चलो आज 15 साल पहले चलते  है

चलो आज 15 साल पहले चलते  है,
वो छोटी सी मासूम बच्ची से मिलते है ,
जिसको सारी दुनिया सच्ची लगती थी,
सारी दुनिया अच्छी लगती थी,
सड़क पर टेड़े मेडे साँप जैसे चलती थी,
किसी के तानो भरी बातों से भी कहाँ डरती थी,
बेसुरी आवाज़ के साथ भी भरी महफिल में गाने की हिम्मत रखती थी,
वो बच्ची किसी अंजान से बात करने की भी जुर्रत रखती थी,
चोट लगने पर आँसू की नदियाँ बहा देती थी,
और फिर गुब्बारों को उड़ता देख यूँ खिलखिला के हँस दिया करती थी,
पापा का सर पे हाथ रखना, माँ का दुलार उसके लिए सबसे कीमती था,
दीदी की लाड़ली बहन होना ही एक बहुत बड़ी उपाधि था,
उड़ती चिड़ियो को देख हवा में उड़ना चाहती थी,
शक्तिमान जैसे बुराई से लड़ना चाहती थी,
हर छल कपट से दूर,
हर किसी के लिए प्यार से भरपूर,
उस छोटी सी मासूम बच्ची से मिलते है,
चलो आज 15 साल पहले चलते है..

Comments

Popular posts from this blog

But why, oh why, did you have to go? (For my Papa)

नौकरी (Every working WOMEN story)