मंदिर या मस्जिद

आखिर दिल के हम सच्चे है,
हम Omnist ही अच्छे हैं।
धर्मो से ऊपर इंसान को है मानते,
जात पात से नहीं लोगो के कर्मो से उन्हे है जानते।
कहलो हम दिमाग से कच्चे हैं,
हम Omnist ही अच्छे है।
मंदिर बनेगा या मस्जिद पे क्यूँ लड़ना,
कौन भगवान कहता है तू मेरे ऊपर मरना।
किसी का खून बहा के क्या मिलेगा दिल से पूछो,
पहले धर्म आया या इंसान ये तोह सोचो।
अब तुम बोलोगे की हम बच्चे है,
कोई नही हम Omnist ही अच्छे है।
मंदिर मस्जिद की लड़ाई से किसका होगा भला,
कितना अच्छा हो उस भूमि पे शिक्षा का दीप जाला।
कहलो हम दिमाग से कच्चे है,
हुम Omnist ही अच्छे है।
उस उपरवाले ने बनाया हम सबको एक जैसा,
फिर तेरा भगवान हरा और मेरा भगवा क्यों कर दिया हमने ऐसा।
अब तुम बोलोगे , हम अधर्मियों के गुच्छे है,
क्या करे, हम विद्या को धर्म मानने वाले बच्चे है,
हम Omnist ही अच्छे है।

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